
उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण अनियमितता के मामले ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे अभ्यर्थियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। योगी आदित्यनाथ सरकार अब इस भर्ती की चयन सूची को संशोधित (रिवाइज) करने जा रही है।
शासन स्तर पर इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही नई चयन सूची जारी किए जाने की संभावना है।यह मामला आरक्षण नियमों के पालन में कथित गड़बड़ियों को लेकर वर्षों से विवादों में रहा है।
अभ्यर्थियों का आरोप था कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण व्यवस्था का सही तरीके से अनुपालन नहीं किया गया, जिससे बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए। इस मुद्दे को लेकर कई बार प्रदर्शन हुए और मामला न्यायालय तक पहुंचा। न्यायालय के निर्देशों तथा विभिन्न स्तरों पर हुई समीक्षा के बाद सरकार ने चयन सूची में सुधार का निर्णय लिया है।
सूत्रों के अनुसार, संशोधित सूची तैयार होने के बाद उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी जो नई कट-ऑफ के अनुसार चयनित पाए जाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाने की तैयारी चल रही है। संबंधित अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सके।इस निर्णय से हजारों अभ्यर्थियों में उम्मीद जगी है, जो लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे थे।
अभ्यर्थी संगठनों ने सरकार के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे योग्य उम्मीदवारों को उनका अधिकार मिल सकेगा। अब सभी की निगाहें संशोधित चयन सूची और नियुक्ति प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं। सरकार का यह कदम शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को भरने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

