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Deoria News,Train Route! देवरिया में मौजूद है भारत का सबसे छोटा पब्लिक रेलवे लाइन

भारतीय रेल अपने आप में अनोखा है भारतीय रेल ऐसे रास्ते से होकर गुजरती है जिसे देखने के बाद लोग रोमांचित हो जाते हैं लेकिन भारतीय रेलवे में कुछ ऐसे भी रूट हैं जिसके बारे में दुनिया अभी तक नहीं जानती है कुछ ऐसे भी रूट है जहां सीमित गाड़ियां होती हैं और यात्रा करने वाले लोग सीमित होते हैं अगर खूबसूरती की बात करें तो भारत की रेल खूबसूरती में भी दुनिया में नंबर वन है भारत में कुछ ऐसे ट्रेन है जिसमें यात्रा करना फाइव स्टार होटल में रुकना जैसी है लेकिन कुछ ऐसे भी ट्रेन है जिसमें यात्रा करना काफी मुश्किल है

आज हम आपको बताने वाले हैं उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में स्थित एक ऐसे रेलवे लाइन की जो मात्र 25 किलोमीटर तक चलता है जिसमें रेलवे प्रशासन के द्वारा सारी सुविधाएं प्रदान की जाती है और इस रूट पर चलना काफी रोमांचकारी भी होता है क्योंकि इस रेलवे रूट पर मात्र एक ही ट्रेन चलती है जिसमें प्रतिदिन हजारों यात्री यात्रा करते हैं खास बात यह है कि यह ट्रेन देवरिया जनपद के भटनी से बरहज बाजार तक मात्र चलती है या एक ऐसा रेलवे रूट है जो एक जनपद से शुरू होकर उसी जनपद में खत्म हो जाती है यानी यूं कहे तो देवरिया जनपद के भटनी बाजार से ट्रेन चलती है और बरहज बाजार में जाकर रुक जाती है फिर वहां से वापस आती है

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लेकिन इस ट्रेन की विशेषताएं अभी रुकती नहीं इस ट्रेन में और भी कुछ खूबियां हैं जिसके बारे में अभी तक लोग बहुत कम जानते हैं क्योंकि यह ट्रेन एक ऐसी ट्रेन है जिसका नाम भी लोग अनोखा रखे हैं भोजपुरी में ट्रेन को लोग क्षेत्रीय ट्रेन के नाम से जानते हैं यह ट्रेन भटनी से चलकर सलेमपुर से बरहज के तरफ निकल जाती है यह रेलवे क्रॉसिंग पर भी रूकती है जहां गेटमैन नहीं होते हैं ट्रेन के चालक दल में से एक व्यक्ति आता है रेलवे फाटक को बंद करता है तब ट्रेन आगे बढ़ती है फिर आगे बढ़ने के बाद ट्रेन रूकती है और फाटक खुलती है फिर ट्रेन आगे बढ़ती है सलेमपुर से बरहज के बीच में जितने भी रेलवे फाटक पड़ती है उतनी जगह ट्रेन रुक जाती है यहां तक कि लोग ऐसे भी कहते हैं कि अगर कुछ लोग ट्रेन को रोकने के लिए हाथ मारते हैं तो ट्रेन वहां भी रुक जाती है,

इस ट्रेन में यात्रा करने वाले लोगों का कहना है कि अगर यह रेलवे लाइन को गोरखपुर तक मिला दिया जाए तो इस क्षेत्र के लोगों को काफी फायदा होगा क्योंकि मात्र 25 किलोमीटर के दरमियान यह रेलवे रूट है जिस पर मात्र एक ट्रेन चलाई जाती है जिससे क्षेत्र के लोगों को काफी समस्या भी होती है और सुविधा भी होती है अगर इस इस रेलवे रूट को गोरखपुर से जोड़ दिया जाए तो इस क्षेत्र के लोगों को गोरखपुर जाने आने में काफी सुविधा हो जाएगी और गोरखपुर से भी कुछ ट्रेनों की संख्या बढ़ा दी जाएगी जिसको लेकर कई बार स्थानीय नेताओं ने मांग भी उठाई है लेकिन रेलवे प्रशासन इन मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया है

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