पटना। बिहार के मोकामा से विधायक और पूर्व जदयू नेता अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उनकी जमानत रद्द कर दी है। शीर्ष अदालत ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर 2026 तक संबंधित अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इस फैसले के बाद उन्हें दोबारा जेल जाना होगा।

दरअसल, दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को अनंत सिंह को जमानत दे दी थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए मृतक दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी।
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी हत्या
यह पूरा मामला 30 अक्टूबर 2025 का है। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा क्षेत्र में अनंत सिंह और जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थकों के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसी दौरान विवाद और हिंसा की घटना हुई, जिसमें दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। इस मामले में अनंत सिंह को आरोपी बनाया गया था।
नवंबर में हुई थी अनंत सिंह की गिरफ्तारी
हत्याकांड के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 1 नवंबर 2025 की देर रात अनंत सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए ही मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए थे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ीं मुश्किलें
दुलारचंद यादव के परिवार की ओर से जमानत को चुनौती दिए जाने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। अब शीर्ष अदालत ने उनकी जमानत रद्द करते हुए 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का आदेश दिया है। इस घटनाक्रम से बिहार की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। गौरतलब है कि इससे पहले अनंत सिंह को जदयू ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।