गर्मियों का मौसम आते ही बाजारों में लाल और मीठे तरबूजों की भरमार दिखाई देने लगती है। सड़क किनारे लगे ठेलों से लेकर बड़े फलों की दुकानों तक हर जगह तरबूज की मांग बढ़ जाती है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा तरबूज खाने के बारे में सोचा है जिसमें एक भी बीज न हो? सुनने में यह थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन दुनिया के कई देशों में बिना बीज वाला तरबूज अब हकीकत बन चुका है और धीरे-धीरे भारत में भी इसकी चर्चा बढ़ रही है।

सामान्य तौर पर लोग तरबूज खाते समय सबसे ज्यादा परेशानी उसके काले बीजों से महसूस करते हैं। कई बार बीज निकालने में समय लगता है, बच्चों को खाने में दिक्कत होती है और जूस बनाने में भी परेशानी आती है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी किस्म तैयार की है जिसमें बड़े कठोर बीज नहीं होते। इस तरह के तरबूज को “सीडलेस वॉटरमेलन” कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह कोई जादू नहीं बल्कि कृषि विज्ञान की आधुनिक तकनीक का परिणाम है। वैज्ञानिक अलग-अलग किस्मों के तरबूजों को मिलाकर ऐसी पौध तैयार करते हैं जिससे फल तो बनता है लेकिन उसमें सामान्य बीज विकसित नहीं हो पाते। हालांकि इसके अंदर छोटे सफेद और नरम दाने दिखाई दे सकते हैं, लेकिन वे खाने में परेशानी नहीं देते।
बिना बीज वाले तरबूज को लेकर लोगों की राय भी अलग-अलग है। कुछ लोगों का मानना है कि अगर तरबूज में बीज ही न हों तो उसे खाना और भी आसान और मजेदार हो जाएगा। खासकर बच्चे और बुजुर्ग इसे ज्यादा पसंद कर सकते हैं। वहीं कुछ लोग कहते हैं कि असली तरबूज वही है जिसमें बीज हों, क्योंकि बीज निकालते हुए खाने का अपना अलग मजा होता है।
फल विक्रेताओं का कहना है कि शहरों में इस तरह के फलों की मांग तेजी से बढ़ सकती है। लोग सुविधा वाले उत्पाद ज्यादा पसंद करने लगे हैं। जैसे आजकल बिना बीज वाले अंगूर और पपीते की मांग बढ़ी है, उसी तरह आने वाले समय में बिना बीज वाले तरबूज भी बाजार में आम हो सकते हैं। हालांकि इसकी कीमत सामान्य तरबूज से थोड़ी अधिक हो सकती है क्योंकि इसकी खेती में ज्यादा मेहनत और विशेष तकनीक की जरूरत पड़ती है।
कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत में कई किसान अब नई तकनीक अपनाने लगे हैं। महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में कुछ किसान प्रयोग के तौर पर बिना बीज वाले तरबूज की खेती कर रहे हैं। यदि इसका उत्पादन सफल रहता है और बाजार में अच्छी मांग मिलती है तो आने वाले वर्षों में यह खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बन सकती है।
हालांकि कुछ लोग स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना बीज वाला तरबूज सामान्य तरबूज की तरह ही सुरक्षित माना जाता है। इसे किसी खतरनाक रसायन से नहीं बल्कि पौधों की विशेष क्रॉस-ब्रीडिंग तकनीक से तैयार किया जाता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लोग सच में ऐसा तरबूज खाना चाहेंगे जिसमें एक भी बीज न हो? बदलती जीवनशैली और सुविधा की बढ़ती चाह को देखते हुए इसका जवाब “हाँ” हो सकता है। आने वाले समय में बाजारों में ऐसे तरबूज आम दिखाई दें तो हैरानी नहीं होगी।

