देवरिया। धर्म और मजहब भले ही अलग-अलग हों, लेकिन इंसानियत, आपसी सम्मान और भाईचारे का संदेश सभी को जोड़ता है। उत्तर प्रदेश के देवरिया में विजयदशमी के अवसर पर ऐसा ही एक नजारा देखने को मिला, जहां मुस्लिम समुदाय से जुड़े इसराफिल अंसारी उर्फ गब्बर ने 501 कन्याओं के पूजन का आयोजन कर धार्मिक सद्भाव की मिसाल पेश की। इस आयोजन में हिंदू परंपराओं के प्रति सम्मान और सामाजिक एकता का संदेश दिखाई दिया।

देवरिया की भुजौली कॉलोनी स्थित ब्रजधाम वाटिका में आचार्य रामचन्द्र शुक्ल क्लब के तत्वावधान में 501 कन्या पूजन समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य आयोजक इसराफिल अंसारी उर्फ गब्बर हैं। बताया गया कि वह पिछले छह वर्षों से भगवती जागरण और विजयदशमी के दिन हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार कन्या पूजन जैसे धार्मिक आयोजनों से जुड़े रहे हैं। इस कार्यक्रम में हिंदू संगठनों की सहभागिता भी रही।
विजयदशमी पर 501 कन्याओं का पूजन
सनातन परंपरा में कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। नवरात्रि और विजयदशमी के अवसर पर कन्या भोज, आरती और पूजन के माध्यम से श्रद्धालु अपनी आस्था प्रकट करते हैं। देवरिया में आयोजित इस समारोह में भी इसी परंपरा के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव देखने को मिला।
501 कन्याओं के पूजन का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज में आपसी मेलजोल और सद्भाव की अहमियत को भी सामने रखा। अलग-अलग धार्मिक पृष्ठभूमि के लोगों का एक साथ आना इस बात का संदेश देता है कि सामाजिक एकता और मानवीय रिश्ते किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं हैं।
छह वर्षों से आयोजन से जुड़े हैं इसराफिल अंसारी
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक इसराफिल अंसारी उर्फ गब्बर का पिछले छह वर्षों से भगवती जागरण और विजयदशमी पर कन्या पूजन के आयोजनों से जुड़ाव चर्चा का विषय है। उनके साथ हिंदू संगठनों की सहभागिता भी इस आयोजन को सामूहिक प्रयास का रूप देती है। ऐसे कार्यक्रम विभिन्न समुदायों के बीच संवाद, सहयोग और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भाईचारे और सद्भाव का संदेश
आज के दौर में जब समाज को आपसी विश्वास और एकता की जरूरत है, तब देवरिया का यह आयोजन एक सकारात्मक संदेश देता है। धर्म और पूजा-पद्धति अलग हो सकती हैं, लेकिन एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करना सामाजिक सौहार्द की मजबूत नींव है।
501 कन्याओं के पूजन के माध्यम से बेटियों के सम्मान और नारी शक्ति के महत्व को भी रेखांकित किया गया। यह आयोजन याद दिलाता है कि समाज की असली ताकत आपसी सहयोग, सम्मान और सद्भाव में है।
देवरिया से फिरोज खान की रिपोर्ट।
