आज के दौर में इंटरनेट हमारी जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, नौकरी, बैंकिंग, सोशल मीडिया, ऑनलाइन खरीदारी—हर काम अब कुछ ही क्लिक में हो जाता है। लेकिन इसी इंटरनेट की एक ऐसी दुनिया भी है, जिसके बारे में लोग अक्सर सुनते तो हैं, मगर सही जानकारी बहुत कम लोगों को होती है। इसी दुनिया का नाम है डार्क वेब (Dark Web)। कई लोग इसे सीधे अपराध से जोड़ देते हैं, लेकिन सच यह है कि डार्क वेब को बनाने का उद्देश्य सिर्फ गलत काम नहीं था। इसके पीछे एक अलग सोच और जरूरत थी—गोपनीयता (Privacy) और सेंसरशिप से आज़ादी।
क्या होता है डार्क वेब?

इंटरनेट को अगर आसान भाषा में समझें तो इसके तीन हिस्से माने जाते हैं। पहला है सरफेस वेब (Surface Web), जो सामान्य तौर पर Google, Bing जैसे सर्च इंजन पर दिखाई देता है। जैसे न्यूज वेबसाइट, यूट्यूब, फेसबुक, सरकारी पोर्टल आदि। दूसरा हिस्सा है डीप वेब (Deep Web), जो सर्च इंजन पर नहीं दिखता, क्योंकि वह लॉगिन के पीछे होता है। जैसे Gmail का इनबॉक्स, बैंक अकाउंट, ऑनलाइन पेमेंट डैशबोर्ड, निजी क्लाउड स्टोरेज आदि। तीसरा हिस्सा है डार्क वेब, जो सामान्य ब्राउज़र से नहीं खुलता और न ही आम सर्च इंजन पर दिखता है। इसे एक्सेस करने के लिए आमतौर पर Tor Browser जैसे विशेष टूल की जरूरत पड़ती है।
डार्क वेब बनाया क्यों गया?
डार्क वेब की शुरुआत को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि इंटरनेट पर हमारी गतिविधियां अक्सर ट्रैक हो सकती हैं। किसी भी वेबसाइट पर जाते ही आपका IP Address, लोकेशन, डिवाइस की जानकारी और ब्राउज़िंग पैटर्न रिकॉर्ड हो सकता है। ऐसे में कई लोग और संस्थाएं चाहती थीं कि इंटरनेट का एक ऐसा सिस्टम बने जिसमें उपयोगकर्ता की पहचान सुरक्षित रहे और वह बिना डर के जानकारी तक पहुंच सके। इसी उद्देश्य से Tor (The Onion Router) जैसी तकनीक विकसित हुई, जो डार्क वेब का आधार मानी जाती है।
डार्क वेब को मुख्य रूप से इन कारणों से बनाया गया:
- गोपनीयता और पहचान की सुरक्षा
कुछ लोग अपनी निजी जानकारी को इंटरनेट पर सार्वजनिक नहीं करना चाहते। पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, शोधकर्ता या संवेदनशील मामलों में काम करने वाले लोग कई बार अपनी पहचान छुपाकर काम करते हैं। डार्क वेब/टोर उन्हें ऐसी सुविधा देता है कि वे अपनी पहचान और लोकेशन को छुपाकर इंटरनेट इस्तेमाल कर सकें।- सेंसरशिप से बचाव
दुनिया के कई देशों में सरकारें कुछ वेबसाइटें, खबरें या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ब्लॉक कर देती हैं। ऐसे में लोग डार्क वेब या Tor नेटवर्क के जरिए ब्लॉक की गई जानकारी तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। यह सिस्टम खासतौर पर उन जगहों पर उपयोगी माना जाता है जहां अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध होता है। - सुरक्षित संवाद और व्हिसलब्लोइंग
कई बार किसी संस्था या सिस्टम में भ्रष्टाचार या गलत काम की जानकारी सामने आती है, लेकिन बताने वाला व्यक्ति डर के कारण सामने नहीं आ पाता। ऐसे मामलों में डार्क वेब पर कुछ प्लेटफॉर्म बने, जहां लोग बिना पहचान उजागर किए जानकारी साझा कर सकें। इसे Whistleblowing कहा जाता है। - 1
- रिसर्च और साइबर सुरक्षा
आज साइबर अपराध बढ़ रहे हैं। कई कंपनियां और सुरक्षा एजेंसियां डार्क वेब पर यह देखने के लिए नजर रखती हैं कि कहीं उनका डेटा लीक तो नहीं हो रहा, पासवर्ड तो नहीं बिक रहे, या किसी तरह की बड़ी साइबर साजिश तो नहीं चल रही। इस लिहाज से डार्क वेब का इस्तेमाल सुरक्षा जांच के लिए भी होता है।
डार्क वेब को अपराध से क्यों जोड़ा जाता है?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है। असल में डार्क वेब की सबसे बड़ी खासियत है anonymity यानी पहचान छुपाकर काम करना। यही वजह है कि कुछ अपराधी इसका गलत फायदा उठाते हैं। डार्क वेब पर कई बार अवैध चीजों की खरीद-बिक्री, चोरी हुआ डेटा, फर्जी दस्तावेज, स्कैम नेटवर्क, हैकिंग सर्विस और मालवेयर जैसी गतिविधियों की खबरें सामने आती रही हैं। हालांकि यह भी सच है कि डार्क वेब का हर हिस्सा अपराध से जुड़ा नहीं होता, लेकिन गलत इस्तेमाल के कारण इसकी छवि खराब हो गई है।
क्या डार्क वेब खोलना गैरकानूनी है?
सिर्फ डार्क वेब को खोलना या Tor Browser इस्तेमाल करना आमतौर पर गैरकानूनी नहीं माना जाता। लेकिन डार्क वेब पर जाकर किसी भी तरह की अवैध गतिविधि करना, गैरकानूनी चीजें खरीदना, चोरी का डेटा डाउनलोड करना या साइबर अपराध में शामिल होना कानून के तहत अपराध है।
सावधानी क्यों जरूरी है?
डार्क वेब पर कई वेबसाइटें फर्जी होती हैं और वहां स्कैम का खतरा अधिक रहता है। अनजान लिंक पर क्लिक करना, कुछ डाउनलोड करना या अपनी निजी जानकारी देना आपको नुकसान में डाल सकता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति सिर्फ जानकारी के लिए भी डार्क वेब के बारे में जानना चाहता है तो उसे बहुत सतर्क रहने की जरूरत होती है।
निष्कर्ष
डार्क वेब को मूल रूप से privacy, सुरक्षित संवाद और सेंसरशिप से बचने के लिए बनाया गया था। यह इंटरनेट का एक ऐसा हिस्सा है जहां पहचान छुपाकर जानकारी साझा की जा सकती है। लेकिन anonymity की वजह से इसका गलत इस्तेमाल भी बढ़ा, जिसके चलते यह अपराध और अवैध गतिविधियों से जोड़ दिया गया। सही जानकारी और सतर्कता के साथ समझना जरूरी है कि डार्क वेब खुद में “अपराध” नहीं है, बल्कि एक तकनीक है—जिसका उपयोग अच्छा भी हो सकता है और गलत भी।

