देवरिया।
केंद्र सरकार और University Grants Commission (UGC) द्वारा लागू किए गए नए नियमों के विरोध में बुधवार को जनपद मुख्यालय स्थित सुभाष चौक पर भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में छात्र, युवा, शिक्षक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग एकजुट होकर सड़कों पर उतरे और UGC के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने UGC के हालिया नियमों को “काला कानून” बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।

सुबह से ही सुभाष चौक पर जुटना शुरू हुए प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर UGC विरोधी नारे लगाए। “UGC काला कानून वापस लो”, “छात्र विरोधी नियम नहीं चलेंगे”, “शिक्षा का निजीकरण बंद करो” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना था कि UGC द्वारा 2026 में लागू किए गए नए नियम उच्च शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बजाय छात्रों और शिक्षकों पर अनावश्यक दबाव डाल रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि नए नियमों से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता कमजोर होगी और शिक्षा व्यवस्था में सामाजिक विभाजन बढ़ेगा। छात्रों का कहना था कि समानता और सुधार के नाम पर लाए गए नियम जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं और इनका सीधा असर गरीब, मध्यम वर्ग और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों पर पड़ेगा। कई छात्र नेताओं ने मंच से बोलते हुए कहा कि बिना छात्रों और शिक्षकों से राय लिए इस तरह के फैसले थोपना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि UGC का काम शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना और छात्रों का भविष्य सुरक्षित करना है, लेकिन नए नियमों से डर और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार और UGC ने इन नियमों को वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और इसे प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा।
विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि आक्रोशित भीड़ ने लगातार नारेबाजी कर प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। बाद में प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा, जिसमें UGC के नए नियमों को तत्काल निरस्त करने, छात्रों और शिक्षकों से व्यापक संवाद करने तथा शिक्षा व्यवस्था को व्यावसायीकरण से बचाने की मांग की गई।
छात्र संगठनों का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस छात्र की आवाज है जो अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक UGC अपने फैसलों पर पुनर्विचार नहीं करता, तब तक विरोध जारी रहेगा।
कुल मिलाकर सुभाष चौक पर हुआ यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि UGC के नए नियमों को लेकर जमीनी स्तर पर असंतोष गहराता जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार और UGC इस विरोध को किस तरह लेती है और छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है।

