WhatsApp Channel Link

भारत के इस जनजाति के बारे में अभी तक दुनिया को नहीं पता है

दुनिया में कुछ ऐसे जगह हैं जहां आज भी रहस्य बनी हुई है आज पृथ्वी से चांद मंगल ग्रह पर हमारे वैज्ञानिक पहुंच गए हैं लेकिन इस पृथ्वी पर कुछ ऐसी जगह है जहां आज तक वैज्ञानिकों का पैर नहीं पड़ा है मैं बात कर रहा हूं भारत में एक ऐसे ही जनजाति समूह की जो बाहरी दुनिया के बारे में अनजाने उनको मोबाइल फोन रेडियो टीवी मोटर गाड़ी जहाज इसके बारे में कुछ नहीं जानकारी है वह शिकार करते हैं जानवरों का और उनका यही मुख्य भोजन होता है|

जारवा जनजाति जो भारत का प्राचीन जनजाति कहा जाता है

जारवा जनजाति के लोग अपनी भाषा में बात करते हैं जिनकी भाषा अभी तक मॉडर्न युग के वैज्ञानिक भाषा के जानकार लोगों को नहीं पता चल पाया कि कौन सी भाषा में बात करते हैं और यह क्या कहते हैं या भारत के जारवा इलाके में जाना भी भारत सरकार के द्वारा बंद कर दिया गया है इनके इलाके में बिना परमिशन के कोई नहीं जा सकता जो लोग इनके इलाके में जाने की कोशिश की है या तो वह अपनी जान से हाथ धो बैठे या वहां से भाग निकले |

जारवा जनजाति कहां रहते हैं

जारवा जनजाति भारत के अंडमान निकोबार दीप समूह की एक प्रमुख जनजाति है जो दक्षिणी और मध्य अंडमान पर रहते हैं

AD

 

जारवा जनजाति के लोग 2022 में किस तरह से रहते है

जारवा जनजाति के लोग अब धीरे-धीरे बाहरी लोगों के पहुंचने से कपड़ा पहनना सीख गए हैं हाल ही में उन्हें कपड़ा पहने हुए कुछ लोगों ने देखा मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जारवा जनजाति में 380 लोग मात्र बचे हुए हैं इस समुदाय के लोग नाच गाना का ज्यादा शौक रखते हैं इनका पसंदीदा भोजन सूअर होता है जिसे बहुत चाव से खाते हैं

जरवा जनजाति के लिए सरकार ने क्या बनाया नियम

जारवा जनजाति के लिए सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया है कि इस जनजाति के लोगों का सोशल साइट पर किसी तरह का कोई फोटो वीडियो नहीं डाल सकते अगर आप इस कानून का उल्लंघन करते हैं तो आपको 3 वर्ष की सजा हो सकती है

SC & ST आधुनिक 2016 के अनुसार सेक्शन 3 (1) यह प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति इस जनजाति के लिए आरक्षित क्षेत्र में बिना अनुमति के प्रवेश करता है उनकी तस्वीरें खींचता है उनकी नग्न अवस्था का वीडियो बनाता है तो उसको 3 साल की सजा व ₹10000 तक की जुर्माना देना होगा |

जारवा जनजाति के विकास के लिए सरकार ने भी कार्य किया जो 1990 में इन जनजाति को सरकार के द्वारा घर बनवा कर दिया गया लेकिन जारवा जनजाति के लोग अपने क्षेत्र से बाहर बहुत कम निकले कुछ लोग इन घरों में रहते हैं जरवा जनजाति के लोग के अंदर रोग प्रति छमता काफी ज्यादा होती है इसी वजह से यह लोग आज 5000 साल से यहां जीवित है सरकार ने इसलिए अलग रखा है कि इनकी संस्कृति सभ्यता ना बिगड़े और अपनी परंपरागत जीवन शैली को चलाते रहें ।

लेकिन मेरा अपना यह विचार है कि इनको भी मॉडर्न युग के बारे में के बारे में जानकारी होनी चाहिए सरकार को इन जनजाति को भी शिक्षा देनी चाहिए ।

AD4A