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कुशीनगर रामकोला मंदिर का इतिहास || History of Kushinagar Ramkola Temple

कुशीनगर रामकोला मंदिर का इतिहास || History of Kushinagar Ramkola Temple

रामकोला धाम जनपद कुशीनगर उत्तर प्रदेश एक शहर है जहां भव्य सनातन मंदिर बना हुआ है आइए जानते हैं इस मंदिर की इतिहास |  रामकोला जो आज नगर है या कभी जंगल हुआ करता था इस जंगल में परमानंद जी महाराज पूजा पाठ किया करते थे उनके गुरु थे श्री नारायण नंद महाराज उर्फ लंगड़ा बाबा दोनों तपोस्थली रामकोला को माना जाता है जिस स्थान पर सत्संगी महाराज के गुफा थी उस गुफा के ऊपर सत्संगी महाराज उर्फ लंगड़ा बाबा ने अपने शिष्य को ब्रह्मविद्या ज्ञान दिया था कुछ दिन उस स्थान पर परमहंस महाराज ने धोनी जलाकर तथा उस स्थान पर एक बगीचा लगाकर अपने गुरु आदेश के अनुसार भारत भ्रमण दिगंबरी देश में करते हुए अनुसुइया आश्रम चित्रकूट चले गए और महेंद्र गिरी पर्वत की तलहटी में मंदाकिनी नदी के तट पर घोर जंगल में आजीवन निवास करते रहे|

महापुरुषों के एक शिष्य श्री स्वामी राघवानंद जी थे जिन्होंने अपनी घोर तपस्या करते थे 12 वर्ष तक अपने गुरु स्वामी परमानंद जी के आदेश अनुसार ईश्वरीय खोज करते हुए संपूर्ण भारत में विचरण करते हुए भगवान के नाम से प्रसिद्ध हो गए थे इसके बाद अनसूया अनसूया आश्रम  आश्रम चित्रकूट के पीठाधीश्वर परमहंस भी हो गए थे उन्होंने अपने जीवन काल में बहुत ही आश्रमों का निवारण करवाया था तीन जनों के साथ दो एक बार पुरुष में एक विशाल मंदिर बनवाने के लिए सारी सामग्री व्यवस्था कर रखी थी वह स्वामी नारायण नंद जी महाराज रामकोला मंदिर बनवाने की उत्कृष्ट अभिलाषा हुई उन्होंने रामकोला में मंदिर बनवाने के लिए श्री भगवान नंद जी महाराज को अंत प्रेरणा से कई बार प्रेरित करके उनको हॉट पूर्वक आदेश देकर पुरस्कार में मंदिर के बजाय रामकोला में यह मंदिर बनवाने के कहां गया रामकोला चलो रामकोला में मंदिर बनवाओ का रेट 12 दिनों तक लगाते रहे जय श्री परमहंस परम आनंद महाराज  का निर्देश मिलने पर मंदिर रामकोला में ही बनेगा यह स्पष्ट निर्देश 1992 अनसूया महाराज श्री स्वामी भगवान नंद जी को वाराणसी से प्रमाणित आश्रम सामने घाट से प्राप्त हुआ तभी से इस मंदिर की बनने की नींव रखी गई और आज यह रामकोला मंदिर पूरे उत्तर प्रदेश में एक पर्यटन स्थल के रूप में विख्यात है इस मंदिर में किसी भी धर्म के लोग आकर पूजा पाठ कर सकते हैं किसी तरह का कोई रोक नहीं है खास बात यह कि इस मंदिर में भारत के इतिहास से लेकर सनातन धर्म के धर्मगुरुओं का मूर्ति स्थापित किया गया है बताया जाता है कि यहां पर हिंदू देवी देवताओं की सभी का मूर्ति स्थापित है यहां पर महात्मा गांधी सुभाष चंद्र बोस महर्षि बाल्मीकि आदि सभी का मूर्ति स्थापित किया गया है जो मंदिर को और

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भी आकर्षित बनाता है मंदिर के बेसमेंट में परमहंस भगवान नंद जी महाराज की हड्डियों का अवशेष एक कांच के बॉक्स में रखा गया है जहां लोग दर्शन पूजा अर्चना करते हैं इस मंदिर का गेट दूर से ही देखने पर भव्य दिखाई देता है मंदिर के गेट पर भगवान विष्णु को शेषनाग और माता लक्ष्मी के साथ क्षीर सागर की प्रतिमा को अंदर की तरफ दर्शाया गया है इस मंदिर आज्ञाकारी पुत्र श्रवण कुमार उनके माता-पिता के साथ मूर्ति रूप में दिखाया गया है जो बेहद आकर्षक दिखता है इस मंदिर में अनसूया जी कभी मूर्ति बनाया गया है मंदिर के सबसे टॉप पर भगवान शिव शंकर का मूर्ति स्थापित है और कैलाश पर्वत के रूप में दर्शाया है जो बेहद आकर्षक दिखता है या मंदिर पूरे 5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है इस मंदिर का बनावट शिवलिंग के रूप में हुआ है जो बेहद आकर्षक लगता है बात करें इस मंदिर के पर्यटन की तो प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग रामकोला मंदिर मैं दर्शन करने आते हैं मंदिर के मुख्य गेट पर एक खिड़की बनी हुई है जहां ₹10 के टिकट के साथ आपको अंदर जाने की अनुमति मिलती है कुशीनगर का धरती भगवान बुद्ध की धरती मानी जाती है|

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