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देवरिया सीडीओ ने किया बैकुंठपुर गौशाला का औचक निरीक्षण मिली कई सारी कमियां

मुख्य विकास अधिकारी रवींद्र कुमार द्वारा आज काजी हाउस, बैकुण्ठपुर, विकास खण्ड – देवरिया सदर का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। 43 गोवंश संरक्षित पाये गये।
निरीक्षण के दौरान सीडीओ को गौशाला के नोडल अधिकारी द्वारा बताया गया कि पुलिस द्वारा पकड़े गये 07 गोवंश एक सप्ताह पूर्व संरक्षित किये गये हैं। 01 गोवंश जो कि विगत 03 दिवस से बीमार चल रहा था, उसकी दवा नियमित चल रही थी जिसकी आज मृत्यु हो गयी। पशुधन प्रसार अधिकारी द्वारा बताया गया कि कार्यालय केन्द्र काजी हाउस से मात्र 01 कि०मी० की दूरी पर है और उनके द्वारा नियमित रूप से यहाँ पर आकर चिकित्सा एवं अन्य कार्य सम्पन्न किये जाते हैं। पशुधन प्रसार अधिकारी को निर्देशित किया गया कि किसी गोवंश की मृत्यु होने पर मृत्यु गोवंश का पंचनामा / पोस्टमार्टम तैयार करवाकर उसके अन्तिम संस्कार / दफनाने की प्रक्रिया अपने सामने सम्पन्न करायें, परन्तु उनके द्वारा ऐसा नहीं किया जो इनकी शिथिल कार्यपद्धति को प्रदर्शित करता है।
सीडीओ ने मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, देवरिया को निर्देशित किया कि पशुधन प्रसार अधिकारी के विरुद्ध कठोर दण्डात्मक कार्यवाही करते हुए अवगत करायें।

सीडीओ ने गोवंशों को ठंड से बचाव हेतु की गई व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया और पर्याप्त व्यवस्था न होने पर नाराजगी व्यक्त की। ठण्ड से बचाव के लिए इस गोवंश में दो तरफ से तिरपाल लगाये गये थे और दो तरफ खुला था। नोडल अधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि तिरपाल सिलने के लिए दिया गया है, शीघ्र ही उसे लगा दिया जायेगा। यह भी बताया गया कि 40 जूट के बोरे उपलब्ध थे, परन्तु निरीक्षण के समय काऊ कोट बनवाया नहीं गया था, जिससे पशुओं को ठण्ड से बचाव हेतु पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। निरीक्षण के समय टीन शेड के अन्दर अंधेरा था, बताया गया कि 03 दिन पूर्व ट्राली से भूसा लाते वक्त तार टूट गया था जिसे कल ठीक करा लिया जायेगा। मौके पर पानी की व्यवस्था पर्याप्त थी एवं 40 कुंतल भूसा, 2 कुंतल दाना एव 2 ट्राली पराली भी उपलब्ध थी। हरे चारे के लिए बुआई हेतु गोशाला के बगल में ही जिला पंचायत की भूमि पर हरे चारे की बुआई की गयी थी।
निरीक्षण के समय मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पीएन सिंह, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत ज्ञानधन सिंह, नोडल अधिकारी सर्वेश सिंह, केयर टेकर जितेन्द्र तथा पशुधन प्रसार अधिकारी शिवरामपति त्रिपाठी उपस्थित थे।

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