पूर्वांचल समेत पूरे उत्तर भारत में इस समय कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है। देवरिया जनपद में ठंड ने अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं और ज़रूरी काम होने पर ही सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं। सुबह से लेकर देर रात तक शीतलहर, घना कोहरा और सर्द हवाओं ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।

देवरिया के साथ-साथ कुशीनगर, महाराजगंज, मऊ, बलिया, वाराणसी, गाजीपुर सहित पूरे पूर्वांचल में ठंड का प्रकोप जारी है। वहीं बिहार के गोपालगंज, सिवान, छपरा समेत कई जिलों और राजधानी दिल्ली में भी ठंड का असर साफ तौर पर देखा जा रहा है। लगातार गिरते तापमान ने आम लोगों के साथ-साथ बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर भी खतरा बढ़ा दिया है।
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ठंड के बढ़ते असर को देखते हुए प्रशासन ने स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया है। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया गया है, ताकि बच्चों को ठंड से होने वाली बीमारियों से बचाया जा सके। साथ ही जिला प्रशासन की ओर से लोगों को यह हिदायत भी दी जा रही है कि जब तक बेहद ज़रूरी न हो, तब तक घरों से बाहर न निकलें।
तापमान की बात करें तो रात के समय पारा काफी नीचे चला जा रहा है। दिन में भी धूप नहीं निकलने और तेज ठंडी हवाएं चलने की वजह से सर्दी का अहसास और ज्यादा बढ़ गया है। सुबह के वक्त घना कोहरा छाए रहने से दृश्यता भी कम हो जा रही है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो रहा है। कई जगहों पर वाहन चालकों को दिन में भी लाइट जलाकर चलना पड़ रहा है।
ठंड का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों, रिक्शा चालकों, ठेले-पटरी वालों और खुले में काम करने वाले लोगों पर पड़ा है। काम-धंधा ठप होने से उनकी रोज़ी-रोटी पर सीधा असर पड़ रहा है। लोग अलाव और हीटर का सहारा लेने को मजबूर हैं। नगर पालिका और प्रशासन द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की जा रही है, ताकि राहगीरों और ज़रूरतमंद लोगों को कुछ राहत मिल सके।
मौसम विभाग ने भी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि आने वाले कुछ दिनों तक ठंड से राहत मिलने की उम्मीद कम है। शीतलहर और कोहरे का दौर अभी जारी रह सकता है। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने, गर्म कपड़े पहनने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
कुल मिलाकर देवरिया सहित पूरे उत्तर प्रदेश और बिहार में ठंड ने जनजीवन को पूरी तरह से जकड़ लिया है। जब तक मौसम में बदलाव नहीं होता, तब तक लोगों को इसी तरह सावधानी और सतर्कता के साथ दिन गुजारने होंगे।

