मथुरा का मिनी जामताड़ा: देवरसस गांव में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, 400 पुलिसकर्मियों की छापेमारी में 37 गिरफ्तार

मथुरा जिले के देवरसस गांव में साइबर ठगी का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था. गांव की लोकेशन हरियाणा और राजस्थान बॉर्डर के करीब होने के कारण ठग आसानी से सीमा पार कर भाग जाते थे. इसी वजह से पुलिस ने इसे मिनी जामताड़ा नाम दिया. गुरुवार सुबह पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गांव की घेराबंदी की और 12 घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन में 42 संदिग्धों की पहचान तथा 37 लोगों को गिरफ्तार कर लिया.

देवरसस गांव गोवर्धन थाने से करीब 6 किलोमीटर दूर है. सात हजार की आबादी वाले इस गांव में ज्यादातर परिवार साइबर ठगी से जुड़े होने के संदेह में थे. गांव में प्रवेश आसान नहीं था इसलिए पुलिस की टीम सुबह पांच बजे से पहले ही खेतों की पगडंडियों के रास्ते गांव में दाखिल हुई. गांव पहुंचते ही लोग पुलिस को देखकर इधर उधर भागने लगे. कई युवक खेतों में छिपे, लेकिन पुलिस ने दौड़ाकर पकड़ लिया. गांव के हर घर की तलाशी ली गई और लगभग छह घंटे तक कार्रवाई जारी रही.

जांच में सामने आया कि यहां बच्चे होश संभालते ही मोबाइल पर ठगी की ट्रेनिंग लेने लगते थे. अधिकांश लड़के पांचवीं से आठवीं कक्षा तक पढ़े हैं और शुरुआती उम्र में ही जालसाजी में शामिल हो जाते हैं. इंटरनेट पर उपलब्ध एप की मदद से वे लोगों की पहचान बदलने वाला सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करते थे. मोबाइल नंबरों के आगे पीछे अंक बदलकर वे गूगल पे, फोन पे, पेटीएम और ट्रू कॉलर में नाम और पता ढूंढ लेते थे. फिर नंबर पर लिंक भेजकर मोबाइल हैक कर लेते थे और बैंक जानकारी निकालने के बाद खाते से पैसे ट्रांसफर कर देते थे.

पकड़े गए कई युवकों के आधार कार्ड भी फर्जी पाए गए. आधार कार्ड में तस्वीर किसी की और नाम पते किसी दूसरे व्यक्ति के निकले. पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया उनमें बेहतरीन, इमरान, शैकुल, आशू, कालू, तस्लीम, तालिम, अबिद, वाजिद, आरिफ, मुनफेद, रुक्मुद्दीन, हफीज, साहिल, हमीद, फाख, दीपक, शमीम और अन्य नाम शामिल हैं. पुलिस ने बताया कि दो बड़े समूह मिलकर अलग अलग तरीके से साइबर ठगी कर रहे थे. पहला समूह बैंक लिमिट खत्म होने का झांसा देकर लोगों का भरोसा जीतता और लिंक भेजकर मोबाइल हैक कर लेता था.

गांव के कई परिवारों ने पुलिस से शिकायत की थी कि ठगी में शामिल युवकों का गांव में आतंक बना हुआ था. लोग उनके डर से विरोध नहीं कर पाते थे. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि बाहरी लोग यहां रिश्तेदारी नहीं करना चाहते क्योंकि गांव की बदनामी बहुत बढ़ चुकी है. कुछ महिलाओं ने बताया कि उनके बेटे मेहनत मजदूरी करते हैं और उन्हें नहीं पता कि पुलिस उन्हें क्यों ले गई. पुलिस ने स्पष्ट किया कि जांच में जिन पर संदेह था केवल उन्हें ही हिरासत में लिया गया.

देवरसस गांव की सीमा राजस्थान से पांच किलोमीटर और हरियाणा से लगभग पंद्रह किलोमीटर दूर है. रेड के दौरान करीब 120 युवक बॉर्डर की तरफ भाग गए. पुलिस करीब सौ से ज्यादा युवकों को पकड़ने की योजना बना रही थी लेकिन केवल 37 को ही गिरफ्तार किया जा सका. पूछताछ में यह भी सामने आया कि ठगी में शामिल युवक राजस्थान और हरियाणा में रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति खरीदते थे.

पुलिस ने इस रेड को क्रैक डाउन नाम दिया. गोवर्धन थाना प्रभारी निरीक्षक रवि त्यागी ने एफआईआर में लिखा कि साइबर ठगी करने वाले गिरोह की लोकेशन मिलने के बाद पुलिस टीम सरकारी और निजी वाहनों से पहले गांव के बाहर तक पहुंची. वाहनों को मंदिर के पास खड़ा करने के बाद खेतों के रास्ते गांव को चारों तरफ से घेरा गया. मंदिर के पीछे छिपे लोगों का समूह मिला जहां से गिरफ्तारियां हुईं.

गांव में अब भी तनाव का माहौल है. कई लोग कहते हैं कि सभी युवक अपराधी नहीं हैं लेकिन जो करती हैं उनके कारण गांव का नाम बदनाम हुआ है. पुलिस की कार्रवाई के बाद गांव में शांति है लेकिन लोग स्थिति पर नजर रखे हुए हैं.

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