वाराणसी। देश में बुलेट ट्रेन नेटवर्क के विस्तार को लेकर बड़ा ऐलान हुआ है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वाराणसी में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलेट ट्रेन परियोजना के नॉर्थ कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित हाईस्पीड रेल कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पूर्वोत्तर भारत के कई प्रमुख शहरों को जोड़ेगा। इस परियोजना से दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी जैसे शहरों के बीच आवागमन तेज होने की उम्मीद है।
रेल मंत्री के मुताबिक, प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली से आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी होते हुए पटना, सिलीगुड़ी और गुवाहाटी तक जाएगा। इस रेल नेटवर्क के विकसित होने से उत्तर भारत और पूर्वोत्तर भारत के बीच संपर्क मजबूत होगा। खासतौर पर उत्तर प्रदेश के लोगों को इसका बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।
दिल्ली से वाराणसी पहुंचने में लगेंगे करीब साढ़े तीन घंटे
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर तैयार होने के बाद दिल्ली से वाराणसी तक का सफर लगभग 3 घंटे 33 से 35 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इससे दिल्ली और वाराणसी के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों का काफी समय बचेगा। हालांकि, ये यात्रा समय परियोजना के पूरा होने और प्रस्तावित संचालन व्यवस्था पर निर्भर करेंगे।
कानपुर और लखनऊ के यात्रियों को भी मिलेगी राहत
इस परियोजना में उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों को शामिल किए जाने की बात कही गई है। दिल्ली से आगरा, कानपुर और लखनऊ होते हुए आगे अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी तक हाईस्पीड रेल नेटवर्क विकसित होने से इन शहरों के बीच यात्रा का समय कम हो सकता है। इससे व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली से आगरा का सफर 59 मिनट में
रेल मंत्री की ओर से बताए गए संभावित यात्रा समय के अनुसार, कॉरिडोर तैयार होने के बाद दिल्ली से आगरा का सफर लगभग 59 मिनट में पूरा हो सकेगा। वहीं दिल्ली से कानपुर पहुंचने में करीब 1 घंटा 45 मिनट और लखनऊ पहुंचने में लगभग 2 घंटे 12 मिनट लगने का अनुमान है।
पर्यटन और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
बुलेट ट्रेन नेटवर्क से अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक पहुंचना आसान हो सकता है। इससे देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिलने के साथ स्थानीय कारोबार, होटल, परिवहन और रोजगार के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
फिलहाल इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर आगे की विस्तृत योजना, निर्माण प्रक्रिया, समयसीमा और स्टेशनों की जानकारी का इंतजार है। यदि प्रस्तावित कॉरिडोर जमीन पर उतरता है तो उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के रेल परिवहन की तस्वीर बदल सकती है।