उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित बरसाना राधा रानी मंदिर भारतीय संस्कृति, भक्ति और प्रेम का अनुपम उदाहरण है। यह मंदिर राधा रानी के जन्मस्थान के रूप में पूरे देश और विश्व भर के श्रद्धालुओं के बीच अत्यधिक श्रद्धा का केंद्र है। वृंदावन और मथुरा के दर्शन के बिना भले कोई यात्रा अधूरी मानी जाए, लेकिन बरसाना का यह भव्य मंदिर देखे बिना भक्ति की पूर्णता नहीं मानी जाती।

बरसाना का राधा रानी मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जहाँ तक पहुँचने के लिए लगभग 250 से अधिक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। जैसे ही श्रद्धालु ऊपर पहुँचते हैं, उन्हें चारों ओर फैली हरियाली, शांत वातावरण और मंदिर की दिव्यता अपनी ओर आकर्षित करती है। मंदिर की वास्तुकला अत्यंत भव्य है, जिसमें राजस्थानी और ब्रज शैली का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि श्रीकृष्ण और राधा रानी के पवित्र प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि यहाँ राधा रानी अपने पिता वृषभानु के साथ निवास करती थीं और यहीं पर श्रीकृष्ण ने अनेक रासलीलाएँ रची थीं। यही कारण है कि हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ राधा अष्टमी, जन्माष्टमी और विशेष रूप से होली के अवसर पर दर्शन के लिए आते हैं।
बरसाना की लट्ठमार होली तो पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। राधा रानी मंदिर के प्रांगण में जब रंग, गुलाल और प्रेम की बौछार होती है, तो हर भक्त अपनी सारी चिंताओं को भूलकर राधा-कृष्ण के रंग में रंग जाता है। मंदिर प्रांगण में रोजाना भजन, कीर्तन और आरती का आयोजन होता है, जिससे यहाँ का वातावरण सदैव भक्तिमय बना रहता है।
मंदिर के इतिहास की बात करें तो कहा जाता है कि इस भव्य मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में राजा वीर सिंह ने करवाया था। यहाँ के स्थानीय लोग और संत आज भी राधा रानी की सेवा और मंदिर की देखरेख में जुटे रहते हैं। मंदिर परिसर के भीतर सुंदर चित्र, नक्काशी और रंगीन पत्थरों से सजा गर्भगृह श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।
बरसाना मंदिर के आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य भी किसी चमत्कार से कम नहीं। मंदिर की ऊँचाई से पूरा बरसाना गाँव, हरे-भरे वृक्ष और दूर-दूर तक फैले खेतों का दृश्य मन को मोह लेता है। पर्यटक यहाँ आकर मानसिक शांति, भक्ति और ब्रज भूमि की पावनता का अनुभव करते हैं।
यदि आप वृंदावन या मथुरा की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो बरसाना राधा रानी मंदिर अवश्य शामिल करें। यहाँ आने के बाद आपको आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ राधा-कृष्ण की प्रेमगाथा की मधुर अनुभूति होगी।